लेमेन्स इवैंजलिकल फैलोशिप इंटरनैशनल


हमारा विश्वास कथन

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1.   हम एक सच्चे और जीवित परमेश्वर में विश्वास करते हैं। जोकि पूर्णतः आत्मा है जिसमें कोई भौतिक तत्व नहीं है। जिसकी प्रवर्ति प्रेम है। वह सर्व समपन्न है, अविनाशी, सनातन, सर्वज्ञ, सर्वव्यापक, पवित्र, सर्वशक्तिमान और अबोध्य है। अपनी सभी बातों में वह सर्वसत्ताक, अनुग्रहकारी, धर्मी, न्यायी, धैर्यवान, दयावान और केवल यीशु मसीह के द्वारा ही उनके पास आया जा सकता है। हम मानते हैं कि मनुष्य पापी है तथा आत्मिक रूप से गिरी हुई अवस्था में हैं, आदि में परमेश्वर ने ही मनुष्य की सृष्टि की थी। सृष्टिकर्ता परमेश्वर – अपनी असीम सामर्थ और ज्ञान के द्वारा, सारी सृष्टि और चीज़ों की देखभाल, अपनी सर्वौच्च बुद्धि तथा पवित्र विधान, अपने अचूक पूर्वज्ञान तथा अपरिवर्तनीय इच्छा द्वारा, अपने महिमामय अगोचर और धार्मिक उद्देश्य के लिए करते हैं। परमेश्वर प्रेम है, इसलिए उनकी सारी सलाहें तथा कार्य इसी स्वभाव से प्रेरित हो निकलते हैं। एक ही परमेश्वर के तीन व्यक्तित्व हैं, पिता परमेश्वर, पुत्र परमेश्वर तथा पवित्र आत्मा परमेश्वर। यह तीनों पूर्ण रूप से दिव्य भाव से परिपूर्ण और एक हैं, इसीलिए जो सिद्धता केवल परमेश्वर में है, वह इन तीनों में भी है।

2.   पवित्रशास्त्र – बाइबल का स्रोत स्वंय परमेश्वर है और उनकी प्रेरणा से ही मिला है। बाइबल का अधिकार पूर्ण रूप से परमेश्वर में है और यह अद्वितीय और सर्वोपरि है। उद्धार के ज्ञान, विश्वास और आज्ञापालन के लिए, केवल बाइबल ही संपूर्ण, निश्चित और अचूक है।

3.   अमैथुनिक जन्म, मृत्यु और सशरीर पुर्नउत्थान और स्वर्गारोहण, प्रभुत्व तथा यीशु मसीह का परमेश्वरत्व।

4.   पवित्र-आत्मा वह दिव्य अभिकर्ता है जो मनुष्य को उसके पाप का बोध करा उसे शुद्ध और उसका पवित्रिकरण करता है। पश्चाताप और गलतियों का सुधार जो कि किया जाना चाहिए वह भी जीवन में आता है। परन्तु यह सुधार इस बात को नहीं हिला सकता कि उद्धार विश्वास तथा केवल विश्वास से ही है।

5.   प्रायश्चितबलि बन क्रूस पर यीशु मसीह की मृत्यु ही हमारे उद्धार की एकमात्र नींव है।

6.   हम दो विधानो की मान्यता रखते हैं, विश्वासी का बप्तिस्मा और प्रभु का भोज। ये स्वंय प्रभु यीशु मसीह ने स्थापित किये हैं और प्रेरितों द्वारा इनकी पुष्टि की गई है।

7.      प्रभु यीशु का व्यक्तिगत पुनरागमन, मृतकों का जी उठना और सारी मानवता का न्याय (लेखा लिया जाना) यीशु मसीह द्वारा होगा।

8.      पश्चाताप न करने वालों (मन न फिराने वाले) पर अनन्तकाल की सजा, परमेश्वर से अनन्तकाल तक अलगाव तथा उद्धार पाए जनों पर आशीष, मसीह और उनकी कलिसिया की अनन्तकाल सन्नधि।